30 दिल छू लेने वाली भारतीय कहानियाँ, 30 इंटरैक्टिव एक्टिविटीज़, पैरेंट कन्वर्सेशन गाइड्स और लाइफटाइम एक्टिविटी किट — बिना स्क्रीन, बिना बोरिंग उपदेश।
आधुनिक जीवनशैली में हर जागरूक भारतीय माता-पिता इन चुनौतियों से रोज़ाना जूझ रहे हैं:
खाना खाते समय, पढ़ाई के बाद या बोर होते ही बच्चे का हाथ फोन या टीवी रिमोट पर चला जाता है।
"सच बोलो", "बड़ों का आदर करो" जैसे सीधे उपदेश बच्चे सुनते ही अनसुना कर देते हैं या चिढ़ जाते हैं।
ऑफिस और घर की व्यस्तता के कारण माता-पिता और बच्चों के बीच गहरी, दिल से जुड़ने वाली बातें कम हो गई हैं।
बाज़ार में या तो भारी-भरकम धार्मिक किताबें हैं या फिर पश्चिमी संदर्भ, जो आज के भारतीय बच्चों से रिलेट नहीं कर पाते।
हम उपदेश नहीं देते, बल्कि कहानी और एक्टिविटी के ज़रिए मूल्यों को बच्चे के स्वभाव का हिस्सा बनाते हैं।
सिर्फ एक किताब नहीं, बल्कि पूरे परिवार के लिए एक संपूर्ण 30-दिवसीय वैल्यू-बिल्डिंग सिस्टम।
30 दिनों के लिए 30 खूबसूरत मौलिक कहानियाँ। सहज, सरल हिंदी में लिखी गई जो 5-12 साल के बच्चों के दिल में उतर जाए।
माता-पिता के लिए रेडीमेड गाइड, जिससे आप बिना किसी तैयारी के बच्चे के साथ सार्थक चर्चा शुरू कर सकें।
छुट्टियों और वीकेंड पर बच्चों को बिना टीवी और मोबाइल के व्यस्त और खुश रखने के 50 रचनात्मक खेल।
बच्चे के उत्साह को रोज़ाना बनाए रखने के लिए विज़ुअल स्टार चार्ट और 30 दिन पूरे करने पर सम्मान पत्र।
हर दिन एक नया विषय जो बच्चे के चरित्र की मजबूत नींव तैयार करता है:
आपको घंटों का समय निकालने की ज़रूरत नहीं है। सिर्फ 10-15 मिनट का समर्पित समय ही काफी है।
शाम को स्कूल के बाद या रात को सोने से ठीक पहले, फोन को किनारे रखकर 10 मिनट बच्चे के साथ बैठें।
आज के दिन की छोटी और रोचक कहानी बच्चे को पढ़कर सुनाएँ या बच्चे से पढ़वाएँ।
पैरेंट किट में दिए गए बातचीत कार्ड से 2 सवाल पूछें और बच्चे के मन की बात सुनें।
एक्टिविटी पूरी करें और 30-Day ट्रैकर पर मिलकर स्टार भरें। बच्चे के चेहरे पर गर्व देखें!
यह केवल ज्ञान नहीं देता, बल्कि बच्चे की आदतों और सोच में प्रत्यक्ष सकारात्मक बदलाव लाता है:
जब बच्चे को कहानियों और एक्टिविटीज में मज़ा आने लगता है, तो मोबाइल की ज़िद अपने आप कम हो जाती है।
चीज़ें बांटना, दूसरों की मदद करना और जानवरों के प्रति करुणा बच्चे के स्वाभाविक स्वभाव में शामिल होने लगती है।
रोज़ाना 10 मिनट की बिना-स्क्रीन की बातचीत बच्चे के मन में सुरक्षा और विश्वास का अटूट रिश्ता बनाती है।
बच्चा डांट के डर से झूठ बोलना छोड़कर अपनी गलतियों को खुलकर साझा करना सीखता है।
दादा-दादी, नाना-नानी और शिक्षकों के प्रति आदरभाव किसी दबाव से नहीं, बल्कि दिल से निकलता है।
रोज़-रोज़ चिल्लाने और टोकने की ज़रूरत खत्म हो जाती है, जिससे घर का माहौल शांत और खुशहाल रहता है।
नीचे दिए गए टैब्स पर क्लिक करके देखें कि ई-बुक, एक्टिविटी पेजेस और पैरेंट गाइड्स का लेआउट कैसा है:
30 दिनों की अच्छी आदतें, मजबूत संस्कार और खुशहाल बचपन
हम चाहते हैं कि केवल वही माता-पिता इसे लें जिन्हें इससे वास्तविक लाभ मिले:
कोई छिपा हुआ शुल्क नहीं। कोई मासिक सब्सक्रिप्शन नहीं। एक बार लें, हमेशा इस्तेमाल करें।
तुरंत डाउनलोड करें • सभी डिवाइस पर काम करता है • प्रिंट-रेडी
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यदि आपके मन में कोई शंका है, तो यहाँ आपके सभी उत्तर मौजूद हैं:
खिलौने और गैजेट्स कुछ ही दिनों में पुराने हो जाते हैं, लेकिन बचपन में सीखे गए अच्छे संस्कार जीवनभर साथ निभाते हैं।